Thursday, August 1, 2013

जीवन भर का साथी ....मेरा जीवन साथी


आज से करीब डेढ़ साल पहले मेरी जिन्दगी में एक बहुत अहम मोड़ आया।  एक मोड़ जिसने मेरी जिन्दगी में बहुत कुछ बदल दिया, जिन्दगी जीने का मेरा तरीका, अपने वर्तमान और भविष्य को देखने का मेरा नज़रिया। एक मोड़ जिसने मुझमें आत्मविश्वाश भर दिया, बेशक मैं कह सकती हूँ अबतक की मेरी ज़िन्दगी का सबसे हसीन मोड़, वह मोड़ जहाँ मिला मुझे मेरे जीवन भर का साथी ...…मेरा जीवन साथी।


हालाँकि अपनी जिन्दगी में उसे जगह देने से पहले एक अजीब सी झिझक थी मन में (शायद समाज के नज़रिये की वजह से) लेकिन आज मैं पूरे विश्वास के साथ और सच्चे दिल से कह सकती हूँ की पापा की रज़ामंदी के बगैर लिया हुआ मेरा वो फैसला गलत नहीं था क्यूंकि एक अच्छे जीवन साथी के सारे गुण मौजूद हैं उसमें और मैं उसके मेरे जीवन में होने से काफी खुश हूँ। गलत नहीं थी मैं, जब अपनी लगभग पूरी जमा पूँजी लगा दी व्हीलचेयर खरीदने में।


आज मैं साफ़ तौर पर बहुत बड़ा अंतर देख सकती हूँ उसके आने से पहले और उसके आने के बाद के अपने जीवन में।  मुझे याद है उसके मेरे जीवन में आने से पहले चार दीवारों से घिरा एक कमरा बस इतना ही तो था मेरा संसार लेकिन उसने ना सिर्फ उन दीवारों के बाहर की दुनिया खोल दी मेरे लिए बल्कि भविष्य के सुनहरे सपने देखने का भी अधिकार दिला दिया। पैरों की अक्षमता की वजह से जिन्दगी जो ठहर सी गयी थी, उसके आने से बेफिक्र सी नदी की तरह बहने लगी, रास्ते में आने वाले हर चट्टान को लाँघ जाने के जज्बे के साथ।

मुझे याद है वो वक़्त खड़े हो सकने की असमर्थता की वजह से जब ज़मीन पर घिसटती हुयी जिन्दगी काट रही थी हर वक़्त किसी के जूतों तले हाथ या पैर पड़ जाने का डर होता था जहन में, कोई परीक्षा या न टाले जा सकने वाले मौकों पर सार्वजनिक जगहों पर घिसटते हुए हाथों का छिल जाना, पान की पिक या और भी गंदगियों पर हाथ रखने की मज़बूरी या कई बार ना चाहते हुए भी किसी अजनबी(या पापा भी) के द्वारा गोद में उठाये जाने की ज़िल्लत(मदद के लिए) कितना बुरा लगता था ये सब, लेकिन उसके आने के बाद अब सब बदल गया। उसकी बाहों में इतनी सुरक्षित महसूस करती हूँ जितना और कहीं नहीं। भीड़ भरी जगहों पर भी अब बिना किसी के जूतों के डर या गोद में उठा लेने के प्रस्तावों की चिंता के बगैर आत्म विश्वाश और स्वाभिमान के साथ आज मैं जा सकती हूँ तो सिर्फ इसलिए की वो मेरे साथ है हमेशा। मेरा जीवन साथी, मेरा आत्म विश्वाश, मेरे स्वाभिमान का रक्षक, जिसके बगैर मैं अधूरी हूँ और जिसका होना मुझे पूर्णता का एहसास कराता है। वही तो है जिससे मैं प्यार भरी मुस्कान के साथ कह सकती हूँ "तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है,
अंधेरो से भी मिल रही रौशनी है।"



एक बार यु ट्यूब पर एक कविता सुनी थी(शायद प्रसून जोशी की) जिसमें एक लड़की की इच्छा दर्शायी गयी थी उसके जीवन साथी के बारे में, लड़की अपने पिता से मिन्नत करती हुयी कहती है मुझे न राजा के घर ब्याहना न सुनार के घर, मेरा हाथ लोहार के हाथों में दे देना जो मेरी बेड़ियों को काट सके, सुन कर लगा बिल्कुल ऐसा ही तो है न वो भी, उसने भी तो मेरी बेड़ियाँ काट कर सतरंगी सपनो की दुनिया में उड़ने के लिए आज़ाद कर दिया। जिन्दगी की राहों पर हर कदम मेरे साथ रहने वाला मेरे हिस्से के कंकड़, काँटे सब खुद झेल कर मुझे सुरक्षित रखने वाला। सुबह आँखे खोलते हीं पलँग के पास खड़ा नज़र आता है बाहें फैलाए सिर्फ मेरे लिए, मेरे साथ पूरा दिन गुज़ार देने के लिए, वो बना भी तो है सिर्फ और सिर्फ मेरे लिए। अब उसके बगैर जीने के बारे में सोचना भी मुझे गँवारा नहीं क्यूंकि मैं जानती हूँ भले ही पूरी दुनिया मेरा साथ छोड़ दे या मैं हीं खुद लोगों को छोड़ दूँ पर वो एक चीज़ जो जीवन भर मेरा साथ निभाएगी जिसके साथ पूरी जिन्दगी मेरी गुज़र जाएगी वो है मेरा 'व्हीलचेयर।' जानती हूँ मेरे और उसके रिश्ते का अंत अगर कहीं होगा तो वो इस जिन्दगी के बाद मौत के आगोश में। तभी तो कहती हूँ उसे जीवन भर का साथी ... मेरा जीवन साथी 











…आलोकिता 










10 comments:

  1. ऐसा साथी जिसे पाकर सतरंगी सपनों की दुनिया का दरवाज़ा खुल जाए... बेड़ियाँ कट कर आज़ादी की राह रौशन कर दे: सचमुच दुर्लभ होता है ऐसा साथ, ऐसा साथी!
    बधाई आपको इस सकारात्मकता के साथ हमें राह दिखाने के लिए!

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  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  3. सच्चाइयों से मंझी ...अपनी अतुलनीय कांति से रौशनी करने वाली ...तुम्हारा हर पग सफलताएं भरा हो ... स्नेह के साथ अनन्य शुभकामनाये तुम्हे ...

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  4. जिंदगी में तुम्हे हर सफलता मिले ,हार्दिक शुभकामनाएं

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  5. Alokita aaj rula diya tumhari is pratuti nay....par jeevan mey tumhe isi tarah khusiyan aur saflta milti rahe...yahi dua hai bhagwan say.....sada khush raho

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  7. all the best akku .... always with u ji... <3 self dependent hone ka pehla kdm mubark ho ji.... or shayad hmari phn line ko b same hi tym ho gya.... or iske sath hi tumhe ek bhoot b mili thi yaad h na... jo aaj b or hmesha tumhare sath rhegi... :)

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा मंगलवार (06-08-2013) के "हकीकत से सामना" (मंगवारीय चर्चा-अंकः1329) पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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