Wednesday, December 1, 2010

माँ और पिता

आज 2 दिसम्बर, मेरा जन्मदिन है | मुझे जन्म मेरे मम्मी पापा ने दिया है, आज उन्ही की वजह से मैं इस दूनिया में हूँ अतः उन दोनों को ही अपनी रचना समर्पित करती हूँ |
                   माँ
माँ  तो एक पहेली है |
      कभी ममतामई |
तो कभी गुस्से वाली है |
सख्त होती कभी इतनी,
कि चट्टान भी धरासाई हो जाए |
नर्म हो जाती कभी इतनी ,
गुलाब की पंखुड़ी भी सख्त पड़ जाए |
घर की आधारशीला हैं वो ,
बच्चों की भाग्य विधाता भी |
गंगा की निर्मल धारा है ,
कभी उसका रूप ज्वाला है |
इस अंधियारे जग में वही तो एक उजाला है |
माँ तो एक पहेली है |
     कभी ममतामई |
तो कभी गुस्सेवाली है |


               पिता 
माँ की सहृदयता को सबने जाना 
पिता को किसी ने नहीं पहचाना 
माँ अगर है जन्मदाता 
तो पिता भी हैं पालनकर्ता 
पिता की कठोरता में हीं तो है कोमलता 
गुलाब की रक्षा काटा  हीं तो है करता
यह कठोर दाँत न हो अगर भोजन कौन चबायेगा ?
काम करने क लिए उर्जा शरीर कँहा से पायेगा ?
होते हैं नारियल जैसे पिता 
अन्दर से कोमल ऊपर झलकती कठोरता 
पिता तो एक छाते से होते हैं 
इस  दूनिया की धूप पानी से हमे बचाते हैं
पिता के प्यार कुर्बानी आदि को हम झुठला नहीं सकते 
जिन्दगी में उनकी अहमियत को भुला नहीं सकते 

14 comments:

  1. जन्मदिन मुबारक हो अलोकिता

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  2. माँ बाप के बारे में क्या कहाँ जा सकता है, जितना कहो, कम ही लगता है.
    रचना अच्छी है, थोड़ी मात्राओं का भी ख्याल रखे, बाकी सब बढिया है.
    जन्मदिन की शुभकामनाएँ , लिखते रहिये ....

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  3. देर से ही सही हमारी शुभकामनाये आपके साथ है ।
    सब कुछ पाया है जिससे,
    उसको भला क्या दे हम ।
    जिसका मै हूँ अंश अभिन्न ,
    कैसे करू उसका अभिनन्दन ॥
    आपका आने वाला जीवन सफलताओं से पूर्ण हो ।

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  4. bahut bahut dhanyawaad aparna ji

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  5. जन्म दिन की बहुत बहुत बधाई

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  6. बहुत ही हृदयस्पर्शी कविता लिखी है आपने।
    पढ़कर बहुत अच्छा लगा।

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  7. सबसे पहले तो जन्‍मदिन की ढेर सारी बधाई ...और यह रचना जिसके शब्‍द दिल की गहराईयों से निकले हैं भावमय कर गई ...बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  8. bahut sunder
    maata pita sabse acche hain .....
    wo tumhare man ko samajhne waale hain
    sahi kaho to bhagwaaan nahi hota hai ....
    maata pita hi hote hain..

    aur gar koi accha hitaishi mila jivan me to wo bhi us maat pita ka hi tumhe vardaan hai...........isliye tapasya karti jao...vardaan milega kabhi guru kabhi dost ke roop men........

    lekhni ke liye sadar prashansha ........keep going with your writing:)

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  9. Thanks Abhishek Bhaiya
    Dhanyawaad Mridula ji

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