Thursday, December 23, 2010

सुन्दर कौन ?














क्या है सबसे सुन्दर जग में ?
क्या है सबसे कुरूप ?
मन है सबसे सुन्दर जग में |
मन है सबसे कुरूप |
तन का क्या है, आज है गोरा 
कल काला हो सकता है 
काले को भी गोरे में बदला जा सकता है 
मेरी बात पर ज़रा गौर फरमाना 
इस शरीर को है एक दिन मर जाना 
मरने के बाद भी सुन्दर मन को याद करेगा जमाना 


(बहुत पहले मतलब बचपन में लिखी थी ये कविता, पर आज भी मुझे बेमानी नहीं लगी तो सोचा आप लोगों की भी प्रतिक्रिया देख लूँ )

17 comments:

  1. dher sari subhkaamnaye ....aapki lekhni nirantar chalti rahe ....

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  2. सुन्दर पंक्तियां !

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  3. सत्य कहा आप ने . मन ही है जो मृत्यु के बाद भी साथ रहता है और यही हमारी मूल प्रवत्तियो को संचित रखता है . यदि मन स्वच्छ है तो फिर उस से सुन्दर और कुछ हो ही नही सकता है .
    (मन का यहाँ व्यापक अर्थ में प्रयोग हुआ है)

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  4. @Bali sir
    @udan tashtari ji
    @Abhishek ji
    Thanks

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  5. Merry Christmas
    hope this christmas will bring happiness for you and your family.
    Lyrics Mantra

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  6. मेरे विचार से सुंदर यह है

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  7. बचपन मे भी बहुत ही उन्नत भाव थे…………सुन्दर विचार्।

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  8. सच है सूरत से ज्यादा सीरत याद रखी जाती है ...

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  9. जग में सुन्दर है दो नाम्… अच्छी पोस्ट , शुभकामनाएं । पढ़िए "खबरों की दुनियाँ"

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  10. @Harman ji
    @unmukt ji
    @vandana ji
    @Sangeeta ji
    @ khabron ki dunia ji
    aap sabhi logon ka tahe dil se shukriya

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  11. आज भी आपको बेमानी नहीं लगती इसका मतलब है कि आप का मन बच्चे सा सुंदर है।

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  12. सुन्दर भाव, सुन्दर कविता.

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  13. sunder wo jiske baaton se man ko prasannata mile..:):)

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