Thursday, November 25, 2010

शायरियाँ

सब कहते हैं, तू उसे याद न कर
पाने को उसे रब से फ़रियाद न कर 
तू हीं बता धड़कन में बसी यादों को मिटायें तो कैसे ?
जिन्दगी को अपनी हम भुलाएँ तो भुलाएँ कैसे ?
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आप मेरे लिए कोई फ़रिश्ता तो नहीं 
आप से हमारा कोई रिश्ता तो नहीं 
फिर भी पता नहीं क्या अपनापन झलकता है 
आपके सामने तो हमे सारा जग बेगाना लगता है 
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हम रो न सके तो ये न समझना, जुदाई का हमे गम नहीं 
रो कर प्रियतम की यादों को बहा देने वालों में से हम नहीं 
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आपकी बाँहों में मर जाना चाहते थे हम 
दो पल में पूरी जिन्दगी जी जाना चाहते थे हम 
शायद खुदा को वो भी गँवारा न हुआ 
क्योंकि वो दो पल भी हमारा न हुआ 
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इस दुनिया के लिए तो बस एक इंसान हो तुम 
मेरे लिए तो मेरा पूरा जहाँ हो तुम 
करोडो में एक तारा टूट गया तो क्या 
इस दूनिया से एक इंसान रूठ गया तो क्या 
कर सको तो इतना एहसान करो तुम 
रूठ कर यूँ न हमारी दूनिया वीरान करो तुम 
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हमने सोचा न था कभी किश्मत ऐसा रंग लायेगा/ लाएगी 
हमे मझधार में छोड़ तू परायों का हो जायेगा/ जाएगी 
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अजीब किस्मत है हमारी 
अजीब फितरत है हमारी 
जिसने दिल को तोड़ा 
दिल में उसे बसाये रहते हैं 
ख्वाबों को जिसने तोड़ा 
सपनों में उसे सजाये रहते हैं 
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सागर पर चलना चाहा 
हमसे किनारे भी छुट गए 
परायों को अपनाना चाहा 
वो न मिले कुछ अपने भी रूठ गए 
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तुझे याद हम करते नहीं 
तेरी याद हमे आ जाती हैं 
आती भी है तो कुछ ऐसे 
की भीड़ में हमे तन्हा कर जाती है 
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सोचा था तुझपे प्यार लुटाकर 
तेरे दिल में घर बनायेंगे 
हमे क्या पता था दिल देकर 
भी हम बेघर रह जायेंगे 
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वफ़ा कर के भी हम उन्हे पा न सके 
बेवफा हो कर भी हमारे दिल से वो जा न सके 
रातों को उनकी अपनी ख्वाबों से हम सजा न सके 
नींदे उड़ा कर भी हमारे खवाबों से वो जा न सके 
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6 comments:

  1. 5,7,8,9,11 numbers ki rachnayen mujhe pasand aayi hain....baki bhi acchi hain...par ye qabil-e-taarif hain......continue writing...

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  2. mere sheron mein se sawa sher dhundh nikalne k liye dhanyawaad

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  3. wafa ker ke bhi hum unhe pa na sake..
    bewafa hoke bhi hamara dil se wo ja na sake..
    .................really nice...................

    isi tarah ki ek meri rachna hai :
    "kahte hain log tumko bewafa ho, bure ho..
    farista to nhi mai, tum jaise ho, mere ho.."

    sari rachnayen man ko chhuti huyi..

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  4. some impressive expression out there; innocent, delicate and virgin, yet mature in opinion; you thoughts are potentially penetrating and ultimately gives a very soothing effect.

    way to go.


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