Wednesday, December 15, 2010

कविता

सोचा चलो लिखूँ एक कविता ,
फिर सोचा क्या है ये कविता ?

मनोभावों की संसार है कविता ,
बहती एक रसधार है कविता |

मृदु भावों की मिठास है कविता ,
मन का कभी उल्लास है कविता |

व्यथित ह्रदय की आह है कविता ,
शब्दों की प्रवाह है कविता |

कभी छोटी सी कथा है कविता ,
कभी मन की व्यथा है कविता |

प्रताड़ित की आवाज़ है कविता ,
प्रेम की एक अंदाज़ है कविता |

व्यंग्य की मीठी कटार है कविता ,
जीवन का प्रसार  है कविता |

कल्पना की उड़ान है कविता ,
कवि की पहचान है कविता |

कला की एक वरदान है कविता ,
चिंतन की विधान है कविता |

कवियों की जज्बात है कविता ,
विशुद्ध ह्रदय की चाह है कविता |   

13 comments:

  1. कवियों की ज़ज्बात है कविता
    विशुध्ध हृदय की चाह कविता //
    मन को तुमने मोह लिया //

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  2. sunder ati sunder......:)

    ek aatm gyan hai kavita
    jivan jine ka sopan hai kavita

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  3. bahut achchha vishleshan kiya hai ''kavita '' ka .badhai !

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  4. कविता को तो आपने सुन्दर शब्दों में ढाला ...बधाई.
    कभी 'शब्द शिखर' पर भी पधारें.

    यदि आप प्रेम आधारित रचनाएँ लिखती हैं तो 'सप्तरंगी प्रेम' के लिए hindi.literature@yahoo.com पर परिचय व फोटो सहित भेज सकती हैं.

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  5. Baban sir,Dewesh sir, Abhishek bhaiya, Shikha ji aur Akanksha ji Dhanyawaad

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  6. अच्छी विवेचना है, वर्तनी पर भी ध्यान दे, ४-५ जगह गलत दिखी. लिखते रहिये ....

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  7. Sukriya majaal sir likhne k baad maine dhyan nahi diya tha 2 galti dikhi maine sudhar liya

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  8. bilkul sach...........jo kaha ek dum sateek aur sundar....kavita ko purn rup se chitrit karti hui
    ...
    badhai................

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  9. सोचा की बेहतरीन पंक्तियाँ चुन के तारीफ करून ... मगर पूरी नज़्म ही शानदार है ...आपने लफ्ज़ दिए है अपने एहसास को ... दिल छु लेने वाली रचना ...

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