Wednesday, February 15, 2012

प्रथम वेलेंटाइन डे


गलतियाँ तो हर इंसान से होती हैं | कभी वक़्त गलत होता है तो कभी हालात, कभी इंसान गलत होता है तो कभी उसके जज्बात | पर बंधुओं जिन्दगी में कभी कभी ऐसा भी होता है भले हमसे कुछ गलत हो जाए पर वक़्त और हालात इतने सही होते हैं कि हर गलती सही हो जाती है, और ऐसा जब जब होता है तो कसम है ऊपर वाले की, बड़ा मज़ा आता है | अब देखिये आज सुबह सुबह अगर सही वक़्त पर मुझसे गलती नहीं हुई होती तो इतनी मज़ेदार बात मुझे पता ना चलती और आप इसे पढ़ ना रहे होते | 
दरअसल हुआ ये कि आज सुबह सुबह हर रोज़ की तरह एक शिष्ट आधुनिक छात्रा बन के मैंने बुक खोला........... वही हम सबका सार्वजनिक बुक 'फेसबुक' | जैसे हीं पहला पन्ना खोला हरे सिग्नल के साथ मेरी एक महिला मित्र नज़र आयीं, अभी कुछ महीने पहले हीं परिणय सूत्र में बंधी हैं  तो सोचा चलो आज की पढाई इनकी हीं जिन्दगी से शुरू कि जाए | मैंने फटाफट लिख दिया "क्या हाल चाल है?" जैसे हीं इंटर दबाया ऐसा हीं एक प्रश्न मेरे सामने भी उछल कर आया और प्रश्नकर्ता थे मेरे एक मित्र जिनकी उम्र(53) कि वजह से मैं कहती हूँ उनको चचा जी | अदब से मैंने सलाम ठोका और लिख दिया मज़े में हूँ | इधर मेरे प्रश्न का भी काफी लम्बा चौड़ा उत्तर आ चुका था, उसे पढ़ कर नज़रें किबोर्ड पर गड़ाई और फटाफट अपने असली मकसद पर आई "तो फर्स्ट वेलेंटाइन डे, गिफ्ट शिफ्ट कि बारिश हुई होगी ? क्या क्या मिला?? कुछ अनुभव हमारे साथ भी शेयर कर लो" इतना टाईप करके खटाक से इंटर दबाया और जवाब के लिए कम्प्यूटर स्क्रीन को देखा तो मेरे तो होश हीं उड़ गए, मुँह से निकला "हाय राम शब्द किसको कहने थे मुझको किसको समर्पित हो गए" | खुद को हीं गाली देने का मन हो रहा था, क्या सोचेंगे अब चचा जी? अच्छा अच्छा शरीफ बच्चा वाला इम्प्रेसन गया खटाई में, पूरी इज्जत का फालूदा बन गया | सोचा सौरी लिख के स्थिति समझाउं पर तबतक उधर से जवाब लिखा जा चुका था "ह्म्म्म पहली बार कोशिश तो थी वेलेंटाइन डे मनाने की पर  गिफ्ट ? जूतों की बारिश हुई थी" | जवाब पढ़ के मैं तो बिल्कुल हिल गयी चार सौ चालीस वाट का झटका लगा | जूतों की बारिश? इससे अधिक कुछ लिख ना सकी आगे उन्होंने ही सारा माजरा बताया | उन्होंने क्या क्या बताया अब मैं क्या बोलूँ चलिए पढ़ लीजिये उनकी कहानी उन्ही कि जुबानी उनके अपने शब्दों में ........... 
""मैंने ना कभी ऐसा सोचा था ना इस बार सोचता पर क्या कहें हमारी औरकुट फेसबुक की दुनिया में दोस्ती के लिए उम्र का कोई प्रतिबन्ध तो है नहीं, मैंने भी बहुत से कम उम्र के लोगों से भी दोस्ती कर रखी है उन्ही में है एक, तृषा कुछ तेईस चौबीस साल की होगी | अक्सर बात होती है उससे, अभी दस दिन से पीछे पड़ी थी वेलेंटाइन डे का क्या प्रोग्राम है ? मैंने कहा था कि ये हमारे उम्र के लोगों के लिए नहीं है तो कहने लगी प्यार के इज़हार में उम्र कहाँ से आ गया प्यार तो अज़र अमर है वगैरह वगैरह | मैं भी उसकी बातों में आ गया, सोचा सही हीं तो कह रही हैं | पेपर में, फेसबुक में जहाँ जहाँ मिला हर जगह से टिप्स पढ़ पढ़ के पूरी तैयारी कर ली ये भी ठान लिया कि कुछ भी हो जाए चौदह को झगडा बिल्कुल भी नहीं करूँगा | सबसे पहले तो रात को बारह बजे श्रीमती जी को जगाने की कोशिश की तो जोरदार झाड पड़ी "आपकी तरह आराम से आठ बजे तक सोते नहीं रहना है, मुझे भोर से हीं उठ के झाड़ू पोछा करना है रसोई का काम अलग से, ज़रा सी नींद लगी नहीं कि पता नहीं क्यूँ जगाने लगे " मैं चुपचाप सो गया सुबह उठा तो उसका मूड अच्छा था काफी खुद हीं शर्माती हुई सी आई और मुझे एक ख़ूबसूरत से पैक किया हुआ गिफ्ट देती हुई बोली " ए जी है...हैप्पी.......अम्मम्म......... आज जो है ना वही वाला डे जी, आप समझ गए ना मुझे बोलने में शर्म आ रही है" और हंसती हुई आँचल में मुँह छिपा लिया | उसे देख कर मुझे भी थोडा जोश आ गया मैंने बोला हाँ उसी लिए मैंने भी एक गिफ्ट ख़रीदा है और उसे मैंने वो नया जूता दिखाया जो मैंने ख़रीदा था, देखते हीं बिफर पड़ी अभी दो सेकेण्ड पहले नाज़ुक सी कली लग रही थी अचानक से अंगारा बन गयी | अब बताओ इसमें मेरी क्या गलती है अखबार में लिखा था 'अगर आप समझ नहीं पा रहे कि अपने साथी को क्या तोहफा दें, तो ध्यान दीजिये कि  उन्हें किस चीज़ की चाहत है, हो सकता है उन्होंने आपसे कुछ माँगा हो और आपने व्यस्तता की वजह से नज़र अंदाज़ कर दिया हो' मैंने भी सोचा तो पाया कई दिनों से वो रट रही थी "आपके जूते पुराने हो गए हैं नए ले लो लेलो" मैंने वही ले लिया तो अब उसके लिए गुस्सा हो गयी | इसके बाद वो हड़ताल पर चली गयी पर उसका हड़ताल हिन्दुस्तानी नहीं जापानी स्टाइल में होता है ज्यादा काम करने लगती है, नास्ते में रोटी पर रोटी डालती चली गयी और ऐसे मौके पर थाली में कुछ छोड़ना भी गुनाह है सात रोटियाँ खाने के बाद मुश्किल से उठ पाया | ऑफिस जाते वक़्त मैंने अपने  जूते  भी लौटा दिए दुकानदार से बहस हो गयी अलग | शाम को लौटते वक़्त बेटे का फोन आया मतलब साफ़ था सब जगह फोन करके खबर पहुँच चुकी थी कि मैं कितना ज़ालिम हूँ, बेदर्द हूँ सब कुछ हूँ | बेटे ने समझाया घर जा के मम्मी को मना लीजिये कहीं बाहर ले के जाइए | उसने फोन रखा तो बेटी का फोन आ गया क्या "पापा आप भी ना गज़ब हैं एक तो मम्मी के लिए कुछ लाये नहीं और उनका गिफ्ट खोल के देखा तक नहीं ? गलत बात है ना ?" सब के निर्देश सुनने के बाद घर जाने के रास्ते में सोच रहा था कहाँ ले जाऊं होटल जाने का कोई फायेदा नहीं पहले तो मुझे खाने नहीं देगी बी पी, कोलेस्ट्रोल, सुगर सबका नाम ले लेके, और मैं नहीं खाऊंगा तो खुद भी बिना खाए हीं वापस चली आएगी | सोचा घर पहुँच के पहले उसका तोहफा देखता हूँ है क्या | पता है उस सुन्दर से पैकेट में क्या निकला ? जूता वो भी आठ नंबर का जबकि मैं पहनता हूँ नौ नंबर | पूछने पर उसने कहा क्या! आठ नंबर!! ओह वो क्या है ना चश्मा मैं घर पर हीं भूल गयी थी तो आठ को नौ  पढ़ लिया होगा, जाके बदलना पड़ेगा वरना चार हज़ार डूब जायेंगे | सुबह वो शेरनी बनी थी अब दहाड़ने की बारी मेरी थी मै पूरी ताकत से चिल्लाया "क्या! चार हज़ार ? दिमाग तो ठीक है तुम्हारा ? अरे इतने महंगे जूते तो मैंने अपनी शादी में भी नहीं पहने | सुबह की शेरनी भीगी बिल्ली बनके खड़ी थी धीरे से बोली "स्कूटर निकालिए ना चल के बदल लेते हैं ऑटो से तो पचास रूपए लग जायेंगे, वो जो नया वाला मॉल खुला है ना वहीँ से लायी थी" | अब क्या कर सकता था स्कूटर से मॉल गए और वहाँ जा के पता चला मुझे तोहफे का मूल्य मालुम ना पड़े इसलिए उसने डब्बे पे से दाम वाले स्टीकर को हटा दिया था और कैश मेमो उसी दिन फेंक चुकी थी, मॉल की पॉलिसी के तहत अब उस माल को लौटाया नहीं जा सकता था | वो बेचारी तो पहले से हीं आत्मग्लानि के बोझ से दबी खड़ी थी और मैं चार हज़ार के झटके के बाद उस वक़्त कुछ कहने की स्थिति में नहीं था | मौन व्रत धारण किये हम दोनों घर आये और यूँही चार हज़ार के शोक में मौन व्रती हीं बने रह गए | यही रहा मेरे प्रथम वेलेंटाइन डे का अनुभव ""  

8 comments:

  1. जय हो …………)))))))))हम भी मौन्।

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  2. khub hua jo hua ...achha intersdting velentine day ban gaya ..

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  3. nice post...jyaada nahi kahunga..chup rahana hi badhiya hai.

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  4. मजेदार वाक्‍या।

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  5. बढ़िया मज़ेदार प्रस्तुति ...

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  6. mazedaar ..... ab to ise padhkr mn kr rha h ki m b last to last year ka kissa likh daalu...man to pehle b hua tha likh daalu pr likha nhi tha kya valentine tha pta h dogi ne kaath liya tha or hum log khub has rhe the... drd wrd sb bhul gye hahahahahah aaj b yaad aata h to hasi aaj ati h... m boli sab ka apna apna style h wish krne ka ji...hahahahahha

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