Tuesday, January 25, 2011


















चिड़िया रानी चिडिया रानी
क्यूँ तेरी आँखों में पानी ?
बतलाओ न अपनी कहानी
                क्या बतलाऊ  मछली बहना
                दुश्वार किया इंसानों ने जीना
                 पहले आश्रय स्थल पेड़ को छिना
                 अब जाल में फंसाते डाल कर दाना
कभी न सुनते हमारा कहना
हमे न इन  पिंजड़ों में रहना
उनकी कटोरी का दाना नहीं खाना
न हीं उनका मिनरल वाटर है पीना
                   हमे नहीं बनना है उनके घर का गहना
                    नील गगन में स्वछंद विचरण है करना
                   हमे तो बस प्रभु की इस दुनिया में है उड़ना
                   आकाश की हर ऊंचाई को है चूमना
हमे तो क्षितिज से हैं बाते करनी
इसी तरह खुशी से है जीना
और खुशी से हीं है मरना








12 comments:

  1. बहुत सुन्दर बाल कविता।

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  2. आलोकित दी ..... आज तो कमाल कर दिया ...हम सब बच्चे खुश हुए... थैंक यू

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  3. मजेदार...
    हम पंछी उन्मुक्त गगन के पिंजर-बंध ना रह पायेंगे....

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  4. भौत अत्‍थी लचना। मजा आ गया, थच में ऐसा लगा मानों मैं बच्‍चा बन गया ।

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  5. सार्थक और बेहद खूबसूरत,प्रभावी,उम्दा रचना है..शुभकामनाएं।

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  6. गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाइयाँ !!

    Happy Republic Day.........Jai HIND

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  7. वाह जी बल्ले बल्ले

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  8. एक दम उन्मुक्त कैसे हुआ जाये चिड़िया की तरह ....वाह आलोकिता जी क्या खूब लिखा है ...यूँ ही अनवरत लिखती रहें यही कामना है ...शुक्रिया आपका

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  9. बहुत प्यारी रचना ... :)

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