Monday, December 13, 2010

आँसु की कहानी

कल मैंने देखा एक सपना ,
सपने में रो रहा था कोई अपना |

वह थी हमारी धरती माता ,
हमसे है उनका गहरा नाता |

बहुत पूछने पर सुनाई आँसु की कहानी,
जिसे सुनने पर हुई मुझे हैरानी |

उन्हें नहीं था अपने बुरे हाल का  दुःख ,
नहीं चाहिए उनको हमसे कोई सुख |

उनकी गम का कारण थे हम ,
फिर भी हमारे लिए थी उनकी आँखे नम|

उन्होंने ने कहा मनुष्य बन रहे अपनी मृत्यु का कारण,
मेरे पास नहीं है इसका निवारण |

कभी मुझ पर हुआ करती थी हरियाली ,
मनुष्यों के कारण छा गयी है विपदा काली|

                                                                                अपनी सुन्दरता से मुझे क्या है करना ?
                                                             मनुष्यों के लिए हीं मैंने पहना था हरियाली का गहना |

                                  
                                   यह जानते हुए भी मनुष्य कर रहे पेड़ो की कटाई,
                                   अपनी बर्बादी को मनुष्यों ने खुद है बुलाई |

कहीं यह सपना बन ना जाए सच्चाई ,
इसीलिए प्लीज़ रोको पेड़ो की यह कटाई |

17 comments:

  1. आलोकित जी

    बहुत सुंदर प्रस्तुति. सही कहा आपने . प्रकृति से खिलवाड़ हमें महंगा पड़ सकता है....
    .

    मेरे ब्लॉग सृजन_ शिखर ( www.srijanshikhar.blogspot.com )पर " हम सबके नाम एक शहीद की कविता "

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  2. बहुत सुन्दर ! आपने वास्तव में बहुत ही सहज औए प्रभावी अन्दाज़ में एक यक्ष प्रश्न उठाया है ! आप का आभारी होना चाहिए पाठक व इस दिशा में कोई पहल होनी चाहिए !

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  3. truly brilliant..
    keep writing........all the best

    regards
    your bro

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  4. Thanks Upendra sir, Bali sir,Abhishek bhaiya and Sanjay Bhaiya thanks 2 all of u

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  5. सुन्दर कविता...पेड़ों की कटाई नहीं होने चाहिए. अब मैं आपको दीदी कहा करुँगी..ठीक है.
    ________________
    'पाखी की दुनिया; में पाखी-पाखी...बटरफ्लाई !!

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  6. dharti maa ! ki chinta jayaj hai .aap bahut achchha likhti hai .shukamnaye .

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  7. This comment has been removed by a blog administrator.

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  8. Well, deforestation is necessary for economic growth. What to do? Either the humanity grows or the trees, humanity chose for humans.

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  9. But Sir human will grow if they survive, and 4 survival they need oxygen and 4 dat trees. It can be done in a balanced way 2. But we r ignoring dat balance isn't it?

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  10. Well, Oxygen is generated by trees but there is no dearth of Oxygen. I never came across any report about any death (or suffocation) due to lack of Oxygen in 'normal' circumstances. It is not that I ignore the importance of trees, but I questioned you because everyone complains about deforestation, while very few show the way. You mentioned rightly about 'striking a balance'. The devil lies in the question "what is the balance and how to achieve it?"

    Alokita, you ended your poem with an appeal to stop cutting trees. Do you think it is realistic? In fact, it should not stop becaue can never stop. People have suggested better ways in the past for this issue.

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  11. Alokita, Not very nice though, I wrote something about trees some time ago that might interest you as a tree lover.

    You can find it here http://kunjmann.blogspot.com/2010/08/tree-rights-versus-human-rights.html

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  12. aap hame nahi janti lekin aap ko janta hu .
    its amezing.

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