Friday, November 12, 2010

वह आखिरी तश्वीर

वह आखिरी तश्वीर 
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नहीं सुनी मैंने किसी और कि जबानी 
यह तो है मेरी आँखों देखी कहानी 
अपने अकेलेपन से ऊबी हुई सी 
अनजाने ख्यालों में डूबी हुई सी 
उस दिन मैं  तन्हा छत पर खड़ी थी 
आंखे बस राहों पर गडी थी 
पहली बार उस दिन मैंने' उसकी' झलक पायी थी 
पड़ोस में रहने 'वह' और उसकी बूढी माँ आई थी 
मुझे मालूम नहीं क्या नाम था उसका 
दुर्बल,साँवला पर आकर्षक चेहरा था उसका 
खिड़की से एक दिन देखा उसे चित्र बनाते हुए 
बदरंग कागज़ पर बेजान तुली से जीवन सजाते हुए 
हाँ एक उम्दा कलाकार था वह 
शांत, संजीदा चित्रकार था वह 
उन मनमोहक चित्रों को देखने के लालच से 
उसके घर गई यूँ एक दिन  हीं बहाने से  
गजब का आकर्षण था उसकी सभी चित्रों में 
सचमुच जान भर दिया था उन बेजान चीजों में 
अपनी कृतियाँ दिखाता और बस मुस्कुराता जाता था 
मैं तारीफ करती पर वह तो बस हँसता जाता था 
उन चित्रों में ऐसी खोई नाम पूछने की भी सुध ना रही 
पाँच घंटे पता नहीं कैसे बस उन चित्रों में खोई रही 
जाते जाते मैंने कहा धन्य हैं ये हाथ जो बेजान चित्रों में जान डाल देते हैं 
पहली बार उसने कहा नहीं धन्य है वो इश्वर जो इन हाथों में कला देते हैं 
शायद घर पर मुझे उस दिन डांट पड़ी थी 
पूरे पाँच घंटे उस अजनबी के घर जो रही थी 
पहली बार डांट सुन मैं रोई नहीं थी 
मैं तो अब तक चित्रों में खोई हुई थी 
अगले दिन किसी के रुदन से मेरी नींद खुली थी 
पता चला उसकी माँ चिल्ला-चिल्ला कर रो रही थी 
मैंने सबको कहते सुना था, ये तो होना ही था 
कैंसर रोगी था उसे तो दुनिया से जाना ही था 
इस वज्रपात से मैं स्तब्ध खड़ी थी 
दुखी थी, किन्तु मैं रो भी न सकी थी 
व्यथित उस बूढी माँ को देखा तो कुछ याद आया 
उसका वह "आखिरी चित्र" आँखों में उतर आया 
बिल्कुल यही हाँ बिल्कुल यही दृश्य था उसमे 
आज भी मेरी यादों में जिन्दा है वो और वह आखिरी तश्वीर 
वह मार्मिक, हृदयविदारक, पीड़ा दायी आखिरी तश्वीर 
                .................आलोकिता 

9 comments:

  1. bahut hi badhiya likha hain aap ne

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  2. मार्मिक कहानी को सुन्दरता से छ्न्दबद्ध किया है आपने।
    मेरे मन के आईने में भी झाँकिए कभी।

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  3. your poetry has magnetic effect which atracts poetry lovers like me .Your poetry is really impressive.

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  4. bahut khoob Alokita ji...........me to fan ho gaya apka

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  5. Bhaut bahut Khoobsoorat rachna hai yeh..Taareef-e-kaabil hai..

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